By, Shivaji Bedre
आपका ब्रॅण्ड नया है, पुराना है, छोटा है, बडा हैकोई फरक नहीं पडता, पर एक बात ध्यान में रखनी चाहिएअॅडव्हर्टायझिंग!, इससे फरक जरूर पडता है। आपको बिझनेस बड़ा करना है तोअॅडव्हर्टायझमेंट जरा जोरसे और हटके करना चाहिए। जो बोलता है वो मिट्टी भी बेच सकता है और जो नही बोलता उनके तो डायमंड भी नहीं बेचे जाते। आपको अगर आपके कस्टमर एवं सप्लायर के सामने रहना हैं तोअॅडव्हर्टायझमेंटकरनी चाहिए। इसके लिए आप कोइ भी माध्यम युज कर सकते हो। लेकीन वो प्रभावी माध्यम होना जरूरी हैंरेडीओ, टिव्ही, न्युज पेपर, ऑडिओ वाला बसस्टँड, होर्डींग, सोशिअल मिडीया, जत्रायात्रा, मेला, …आदी।
विज्ञापन ये एक शास्त्र है और वो टेक्नीक के साथ युज करना पडता है। आपको अच्छा माध्यम चुनके वही पे बार बारअॅडव्हर्टायझमेंटकरनी चाहिए। पहले इस्तमाल करोफिर विश्वास करो‘, जिंदगी के साथ भीजिंदगी के बाद भी‘, दिमाग कि बत्ती जला दे‘, थिंक डिफरन्ट‘, दाग अच्छे है!‘, देश का नमक‘, द टेस्ट ऑफ इंडिया‘, घराला घरपण देणारी माणसं डीएसकेयेअॅडव्हर्टायझिंग की कमाल हैकंपनी का नाम बताने की जरूरत नहीं!
ऐ सभी ब्रॅण्ड ने कंपनी के नाम के साथ फोकस किया है टॅगलाईन को। इसको ब्रॅण्ड स्लोगनएवं पंचलाईनभी कहते है। ऑडिओ माध्यम से आपका ब्रॅण्ड इमेज ग्राहक के दिलोदिमाग में राज करता हैं! ब्रॅण्डनेम अॅण्ड टॅगलाईन से कंपनी की मार्केट मे एक अलग पहचान बनती रहती हैऔर इससे आपके प्रॉडक्ट या सर्व्हीस की सेल्स बढ़ जाती है। आपके कंपनी की प्रॉडक्ट क्वॉलीटी अॅण्ड सर्व्हीस ग्राहक को खुष़ कर देती हैं और दुबारा खरिदने को मजबूर करती हैयहीं आपके बिझनेस सायकल मेंअॅडव्हर्टायझमेंट एक लाइफ लाईन का काम कर देती है! आपके उद्योगव्यवसाय का नाम देशदुनिया में रोशन करने का कामअॅडव्हर्टायझमेंट से होता है…!
इसलिएअॅडव्हर्टायझमेंट के खर्चे को खर्चाकरके नहीं देखना चाहिए ये आपके कंपनी/दुकान की भविष्य बनानेवाली सबसे बडी इनव्हेस्टमेंट है! हमने बचपन में सुने हुऐ ऑडिओ जिंगल्स् आज भी ब्रॅण्डनेम के साथ याद रहते हैये है जादूअॅडव्हर्टायझिंग…! शिवाजी बेद्रे

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